है दुखिया सब संसार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मायावी है जग ये सारा,

है दुखिया सब संसार,

मेरा अब क्या होगा.....

नदिया गहरी नाव पुरानी,

हाथों से छूट गई पतवार,

मेरा अब क्या होगा,

मायावी है जग ये सारा.....

संगी साथी ना कोई सहारा,

जीवन से हुआ लाचार,

मेरा अब क्या होगा,

मायावी है जग ये सारा.....

मैं भी तो हूं माँ बेटा तुम्हारा,

लाल को दिया क्यूं बिसार,

मेरा अब क्या होगा,

मायावी है जग ये सारा.....

अपराध क्षमा करदो मैया मेरा,

विनती नहीं की जो स्वीकार,

मेरा अब क्या होगा,

मायावी है जग ये सारा.....

आया चरण में रखना शरण में,

तूने जो सुनी नहीं पुकार,

मेरा अब क्या होगा,

राजीव का अब क्या होगा,

मायावी है जग ये सारा.....

©राजीव त्यागी

नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।