ममता की वो मूरत है

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॥ पावन पाठ ॥

ममता की है मूरत है करुणा की जो सागर,

मंजू बाईसा हमारी है प्रेम की वो गागर....

जिनके दिल मे रहते, श्री बाबोसा भगवान,

आई है कलयुग में, करने को जन कल्याण,

ये पकड़ ले जिसकी उंगली, उसे लगे कभी न ठोकर,

मंजू बाईसा हमारी....

जिसने बाईसा से, जोड़ लिया है नाता,

उनके जीवन से गम, कोसो दूर हो जाता,

परिवार में उनके आती खुशियाँ खुद ही चलकर,

मंजू बाईसा हमारी....

इस घरती पर बाईसा है एक दिव्य शक्ति,

बाबोसा की कृपा से भक्तो के संकट हरती,

सब कुछ मिल जाता है बाईसा की शरण मे आकर,

मंजू बाईसा हमारी....

जिनको बाईसा का आशीर्वाद मिला है,

उन भक्तो के जीवन का हर पहलू बदला है,

दिलबर प्यार करे वो सबको अपना समझकर ।।

मंजू बाईसा हमारी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।