साईं साईं कहना भक्तो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

भरो, हाज़री भरो, साईं की हाज़री* ll,

ज़रा, दोनों हाथ उठाओ ll,

साईं के दीवानों को, डर के नहीं रहना ll,

साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll

^खड़े दर पे सवाली, सुनो दुखियों के बाली l

तेरी है शान निराली, ना लौटा कोई ख़ाली l

सदा रखी, लाज सब की, किसी से क्या कहना ll,

साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll

साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

^चाँद पाटिल ने माना, महल शब्दी पहचाना l

श्याम था इनका दीवाना, बाईज़ा ने बेटा माना l

साईं जी के, दर्शन को, सब के तरसे नयना ll,

साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll

साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

^सभी को गले लगाया, भेद आपस का मिटाया l

संत होया कोई ज्ञानी, सभी ने बात मानी l

हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई, मिलजुल के रहना ll,

साईं साईं कहना भक्तो, साईं साईं कहना ll

साईं के दीवानों को, डर के,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।