बरसाने में चाकर रख ले अब तो बरसाने वाली

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर दर भटक भटक कर मेरी उमर बीत गई सारी,

बरसाने में चाकर रख ले अब तो ओ बरसाने वाली....

रात और दिन करूँ चाकरी ना मांगू री वेतन,

श्री चरणों में अर्पण कर दूँ मैं तो अपना तन मन,

छोड़ दिया है कुटुंब कबीला छोड़ी दुनियादारी,

बरसाने में चाकर रख ले अब तो ओ बरसाने वाली.....

ब्रज की धुल में प्राण बेस नैनो में राधा रानी,

मैं तो दरस का अभिलाषी मत दीजो रोटी पानी,

एक मुट्ठी ब्रज रज खाकर मैं भूख मिटाऊं सारी,

बरसाने में चाकर रख ले अब तो ओ बरसाने वाली.....

गली गली तेरे गुण गाऊं बन के मस्त फकीरा,

जैसे श्याम की प्रीत में जोगन बन गई रानी मीरा,

राजू के मन चढ़ गई श्री राधे नाम खुमारी,

ओम के मन चढ़ गई श्री राधे नाम खुमारी,

बरसाने में चाकर रख ले अब तो ओ बरसाने वाली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।