हर पल शुकर करूँ

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॥ पावन पाठ ॥

हर पल शुकर करूँ,

मेरे साई तू सदा मेरे साथ है,

आएगी मुश्किल नही,

मेरे सर पे साई जी तेरा हाथ है,

हर पल शुकर करूँ....

अपनी दया तूने सदा बरसाई है,

अंग संग चला बन कर परछाई है,

पल पल मुझे तुमने दी,

साई खुशियों से भरी सौगात है,

हर पल शुकर करूँ....

जिंदगी के मुझे नए रस्ते दिखाए हैं,

दबे हुए अरमान फिर से जगाए हैं,

जीवन के अंधियारों में,

रोशनी की करी बरसात है,

हर पल शुकर करूँ....

हर पल बाबा मेरा साथ निभाया है,

मेरी किस्मत तेरा दरबार पाया है,

शर्मा तेरा हो गया,

तेरी ऐसी हुई करामात है,

हर पल शुकर करूँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।