जब दुख के बादल छाये

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

जब दुख के बादल छाये, कोई राह नजर न आये,

तब बाबोसा ही आकर, मेरे हर संकट को मिटाये,

जब दुख के बादल छाये.....

जब जब में राह से भटका, ये मन मेरा घबराया,

मेरा साथी बनके इसने, मुझे मंजिल तक पहुँचाया,

ओझल हो खुशियाँ आँखों से, ओर गम के बस हो साये,

तब बाबोसा ही आकर, मेरे हर संकट को मिटाये,

जब दुख के बादल छाये.....

राहों से कांटे चुनकर, तूने फूलों की सेज बिछाई,

मेरे सुने जीवन मे खुशियो की गंगा बहाई,

नही तेरे सिवा कोई मेरा सब अपने हुए पराये,

तब बाबोसा ही आकर, मेरे हर संकट को मिटाये,

जब दुख के बादल छाये.....

बाबोसा जो साथ मेरे, चाहत न कोई अब मेरी,

हुईं रोशन दुनिया मेरी, बाबोसा कृपा से तेरी,

बेदाग इस जीवन मे, दिलबर कोई दाग लगाये,

तब बाबोसा ही आकर, मेरे हर संकट को मिटाये,

जब दुख के बादल छाये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।