प्रभु चुनरी मेरी भगती के रंग में रंग देना

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु चुनरी मेरी भगती के रंग में रंग देना,

रंग देना रंग देना,

रंग मंगू न लाल और पिला रे,

रंग मंगू न हरा और नीला रे,

प्रभु चुनरी मेरी भगती के रंग में रंग देना

रंग तेरा हर रंग से न्यारा रे,

यही रंग लागे मुझको प्यारा रे,

प्रभु चुनरी मेरी भगती के रंग में रंग देना,

इस जगत का है हर रंग कचा रे,

बेरंगे का रंग है सच्चा रे,

प्रभु चुनरी मेरी भगती के रंग में रंग देना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।