मन मूरख इतना क्यों भटके

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बोलो राम बोल राम बोलो राम राम,

मन मूरख इतना क्यों भटके तू राम नाम तो बोल ज़रा,

जो दीखता है वह तेरा नहीं,

जो तेरा है वो दीखता नहीं,

तेरी आँखों पे माया का पर्दा पड़ा तू मन की आँखें खोल ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके तू राम नाम तो बोल ज़रा,

बोलो राम बोल राम बोलो राम राम,

मन मूरख इतना क्यों भटके,

तू राम नाम तो बोल ज़रा,

तू राम नाम तो बोल जरा......

जो दीखता है वह तेरा नहीं,

जो तेरा है वो दीखता नहीं,

तेरी आँखों पे माया का पर्दा पड़ा,

तू मन की आँखें खोल ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके,

तू राम नाम तो बोल ज़रा,

तू राम नाम तो बोल जरा......

तू राम शरण में आ के तो देख,

तू राम को मन में बसा के तो देख,

तेरे बिगड़े काम बन जाएंगे,

तू हरी सहारे छोड़ ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके,

तू राम नाम तो बोल ज़रा,

तू राम नाम तो बोल जरा.......

तेरा अपना कोण पराया है,

ये तो सब हरी की माया है,

तेरी नैया भव से पार होगी,

तू प्रभु से नाता जोड़ ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके,

तू राम नाम तो बोल ज़रा,

तू राम नाम तो बोल जरा......

तू राम शरण में आ के तो देख,

तू राम को मन में बसा के तो देख,

तेरे बिगड़े काम बन जाएंगे, तू हरी सहारे छोड़ ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके तू राम नाम तो बोल ज़रा.......

तेरा अपना कोण पराया है,

ये तो सब हरी की माया है,

तेरी नैया भव से पार होगी तू प्रभु से नाता जोड़ ज़रा,

मन मूरख इतना क्यों भटके तू राम नाम तो बोल ज़रा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।