मंत्र पुष्पांजलि

पारंपरिक
श्री गणेश मंत्र गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।

ते ह नाकं महिमान : सचंत यत्र पूर्वे साध्या : संति देवा : ।।

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने ।

नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे ।

स मस कामान् काम कामाय मह्यं।

कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय ।

महाराजाय नम: ।

ॐ स्वस्ति। साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं

वैराज्यं पारमेष्ठ्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं

वैराज्यं पारमेष्ठ्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं

समंतपर्यायीस्यात् सार्वभैम: सार्वायुष आं

तादापरार्धात् पृथिव्यै समुद्रपर्यंताया एकेराळिति

तदप्येष: श्लोको भिगीतो मरूत: परिवेष्टारो

मरूतस्यावसन् गृहे ।

आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्र्वेदेवा: सभासद इति ।।

एकदंतायविघ्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।

तन्नोदंती प्रचोदयात् ।

मंत्रपुष्पांजली समर्पयामि ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।