दीवानी बन जाऊंगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी,

दीवानी बन जाऊंगी मस्तानी बन जाऊंगी.....

जब भोले ने ऐ प्यास लगेगी,

मैं गंगा जमना है त्रिवेणी बन जाऊंगी,

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी…….

जब भोले ने ऐ भूख लगेगी,

मैं हवला पूड़ी हे कचौड़ी बन जाऊंगी,

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी…

जब भोले ने ऐ गर्मी लगेगी,

मैं कूलर पंखा हे ए.सी बन जाऊंगी,

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी….

जब भोले ने ऐ जाड़ा लगेगी,

मैं सोड सोडिया है रजाई बन जाऊंगी,

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी…

जब भोले के ऐ नशा चढ़ेगा,

मैं सुल्फा गांजा है धतुरा बन जाऊंगी,

मैं भोले की दीवानी बन जाऊंगी…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।