जय श्री महाकाल

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय

तस्मै नकाराय नमः शिवाय……

भारत मध्य

स्वयंभू ज्योतिर्लिंग यजामहे

हे परब्रह्म परमेश्वर

शिव शंभू दायमहे…..

शिप्रा के तट पे अवंतिका उज्जैनी नगरी

महादेव के मनन में

है मगन सगरी…

माँ हर सिद्धि पीठ का

लिखा विराजे शिव शिव जापे

आठ पेहर 64 घड़ियाँ

चख शीश नीवाते…….

यक्ष दक्ष करे भस्म आरती

शृंगार दर्शन

ऋषि-मुनि ध्यानी

हर हर हर कर भस्म लेपन…….

बाजे झाझ मांझिरा

डमरू मृदंग……..

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल………

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल…….

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल….

काल के गाल में समाता विश्व सारा

लख चोरासी में भरमाता जगता प्रसारा

शिवा शेखर नटराज गंगाधर उज्जैनी के राजा

नीलकंठ है चंद्र मोली ब्रम्हांड के महाराजा……

विष धारक है जग तारक है

तीनो लोक संभाल

काल भी जिसके वशीभूत है

शिव शंभू महाकाल….

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल…….

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल……….

काल भेराव के समक्ष देत्त्य भी

शमा याचना करते

महादेव के रौद्र रूप से

दानव अकल मृत्यु मरते......

विष धारक है जग तारक है

तीनो लोक संभाल

काल भी जिसके वशीभूत है

शिव शंभू महाकाल…..

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल

जय श्री महाकाल

जय जय श्री महाकाल……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।