॥ पावन पाठ ॥
वृन्दावन बुला लो सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
रूप तेरे में खो जाऊ मैं,
तेरा दीवाना हो जाऊ मैं,
कोई रस वरसाजा सांवरिया,
मेरा हाथ पकड़ ...........
बंसी तेरी रस बरसाती,
जनम जन्म की प्यास बुजाती,
ज़रा तान सुना जा सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
वृन्दावन बुला लो सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
शम शमं बाजे तेरी पायल,
देख के सखिया हो गई घायल,
ज़रा धुमका लगा जा सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
वृन्दावन बुला लो सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
जन्म जनम की आस लगी है,
तेरे दरस की प्यास लगी है,
आजा आजा अपना बना ले सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
वृन्दावन बुला लो सांवरिया मेरा हाथ पकड़,
जादू भरी है तेरी अंखिया,
सखी री कमल लोचन सो हमारी लडगी अंखिया,
लुट लुट जावे तेरी सखियाँ,
जरा नैना लडा ले सांवरिया मेरा हाथ पकड़ के,