हुए है सुदामा अधिकारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

जा बैठे श्रीकृष्ण के द्वारे,

राधा नयन भर निहारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

पानी परात हाथ नहीं लिनो,

अंसुवन पग धो डारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

चावल की पोटली बगल दवाई,

गठरी है बड़ी भारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

दो मुट्ठी चावल कान्हा ने चबाये,

दोनों लोक दे डारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

रुकमणी जी भोजन ले आई,

पंखा झाले बिहारी गए हैं कान्हा के अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

रुकमणी जी ने सेज बिछाई,

चरण दवा में बिहारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

जाओ सुदामा घर अपने को,

बन गए महल अटारी गए हैं कान्हा की अटारी,

हुए है सुदामा अधिकारी गए हैं कान्हा के द्वारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।