जय जयकारा श्री बाबोसा का जय जयकारा

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॥ पावन पाठ ॥

देखो अम्बर से, फूल बरसते है,

नर नारी मिलके, अगवानी करते है,

बाईसा पधारे है, पलके बिछाये हम,

बाबोसा भी आयेंगे, दिल से पुकारे हम,

अंगना सजाओ,चोक पुराओ, मंगल गाओ,

मोति से वधाओ, आया है अवसर प्यारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

गूंज रहा है, जय जयकारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

श्री बाबोसा का जय जयकारा.....

जहाँ जहाँ ये चरण पड़े वो धरती पावन हो जाये,

बाईसा ऐसी कृपा, ये कृपा तेरी,

श्री बाबोसा का बल है आप मे समाया है बाईसा,

हम भक्तो पर ममता की छाया है तेरी,

जन जन में है खुशहाली,

पाई सौगात निराली,

हम भक्तो के भाग्य है जागे,

बाईसा आज जो हमने पाया दर्श तुम्हारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

गूंज रहा है, जय जयकारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

श्री बाबोसा का जय जयकारा.....

पग पग पर भक्त खड़े, राहों में हाथ बिछाये,

हाथों की बदले लकीरे, जो कृपा तेरी,

आई शुभ मंगल बेला, दर्श हुये बाईसा तुम्हारे,

बदलो सबकी तकदीरे ये अर्जी मेरी,

आई है दीवाली, दीपिका ये दीपो वाली,

दिलबर ये दुनिया दीवानी जिनकी,

वो बाबोसा हमे प्राणों से प्यारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

गूंज रहा है, जय जयकारा,

जय जयकारा, जय जयकारा,

श्री बाबोसा का जय जयकारा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।