बाबोसा की कृपा जो भक्तो पे बरसती है

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॥ पावन पाठ ॥

( बाबोसा की भक्ति में जो डूब जाते है,

बनके बाबोसा के प्रेमी जग में सम्मान पाते है,

बाबोसा के रूप में बाईसा हमको मिले है,

देखो इनकी आंखों में, बाबोसा नजर आते है,

बाबोसा नजर आते है। )

बाबोसा की कृपा जो, भक्तो पे बरसती है,

जिसे पाने को सारी, दुनिया तरसती है,

बाबोसा की कृपा जो.....

इस कलयुग में कृपा है बड़ी अनमोल,

गर चाहत है तुझको तो जय बाबोसा बोल,

जो बाबोसा प्रेमी है, उनके संग में रहती है,

बाबोसा की कृपा जो.....

इस कृपा को पाने को नर नारी आते है,

कोई चूरू कोई दिल्ली, कलकत्ता जाते है,

ये मिलती उन्ही को, जिनकी बाबा से प्रीति है,

बाबोसा की कृपा जो.....

बाईसा जँहा आई, बाबोसा भी आएंगे,

अपनी कृपा भक्तो पे फिर वो लुटाएंगे,

एक नही लाखो की यहाँ बिगड़ी सँवरती है,

बाबोसा की कृपा जो.....

भक्ति में मस्त होकर, कर बाबा का गुणगान,

बाबोसा करेगे पूरे, जो दिल मे है अरमान,

दिलबर ये तेरी कृपा, रग रग में बहती है,

बाबोसा की कृपा जो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।