जैन धर्म के हीरे मोती

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॥ पावन पाठ ॥

जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली,

जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली,

ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली....

दौलत की दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आयेगा,

धन दौलत और माल खजाना, पड़ा यहीं रह जायेगा,

सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली गली,

ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा.....

क्यों करता तू तेरी मेरी, तज दे उस अभिमान को,

झूंठे झगड़े छोड़के प्राणी, भज ले तू भगवान को,

जग का मेला दो दिन का, अंत में होगी चला चली,

ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा.....

जिन जिन ने ये मोती लूटे, वे ही माला माल हुए,

दौलत के जो बने पुजारी, आखिर में कंगाल हुए,

सोने चांदी वालों सुन लो, बात कहूं मैं भली भली,

ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा.....

जीवन में दुख है तब तक ही, जब तक सम्यकज्ञान नहीं,

ईश्वर को जो भूल गया, वह सच्चा इंसान नहीं,

दो दिन को ये चमन खिला है, फ़िर मुर्झाये कली कली,

ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।