बाबोसा मुझे तेरा सहारा

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तेरा साथ है कितना प्यारा

बाबोसा मुझे तेरा सहारा,

थामे रहना हाथ हमारा,

अगर जो गिर मैं जाँऊ,

मुझे देना सहारा, दुनिया से मैं हारा,

मैंने.. मैंने तुझको अपना माना,

झूठा है ये सारा जमाना,

तुझे छोड़के ना जाँऊ,

मुझे देना सहारा, दुनिया से मैं हारा,

बाबोसा मुझे तेरा सहारा....

दिया उन्होंने मुझे दगा, जिनसे की मेने वफ़ा,

मुझको कोई फिकर नही, बाबा जबसे तू मिला,

बाबा जबसे तू मिला,

तूने कृपा जो है बरसाई,

है ये तेरी रहनुमाई,

तेरी पनाह में आऊँ,

मुझे देना सहारा, दुनिया से मैं हारा,

बाबोसा मुझे तेरा सहारा....

नही चहिये अब मुझे, धन दौलत, झूठी शान,

धन दौलत झूठी शान,

तन मन तुझपे वार दिया, ये जीवन भी कुर्बान,

ये जीवन भी कुर्बान,

सर पे जो मेरे, है तेरा साया,

बड़ी मुश्किल से, मैंने पाया

मैं सबको ये बताऊँ,

मुझे देना सहारा, दुनिया से मैं हारा,

बाबोसा मुझे तेरा सहारा....

"दिलबर" जो विश्वास हो, मन मे हो सच्ची लगन,

मन मे हो सच्ची लगन,

मंजू बाईसा में हमको, बाबोसा के हो दर्शन,

बाबोसा के हो दर्शन,

सूरज के संग, कविता भी गाये,

सुरो की गंगा बहाये,

हमे गाना पड़ेगा, भजन ये दुबारा,

मुझे देना सहारा, दुनिया से मैं हारा,

बाबोसा मुझे तेरा सहारा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।