भजन बिना कैसे गवां दई ज़िंदगानी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भजन बिना कैसे गवा दई ज़िंदगानी,

किया न कर से करना था जो,

करता रहा मनमानी,

भजन बिना कैसे.....

गर्भवास में जब तू आया,

प्रभु से क्या क्या अर्ज़ सुनाया,

हाथ जोड़कर कसमे खाई,

अब न करब शैतानी,

भजन बिना कैसे.....

सुनी प्रभु ने तोरी आरजिया,

भूल गया मालिक की खबरिया,

पाप की सर पर लादे गठरी,

फिरता रहा अभिमानी,

भजन बिना कैसे.....

परहित कर कुछ पूण्य कमाले,

मानुष तन का लाभ उठाले,

रिखीराम प्रभु के गुण गाले,

बीती जाए जवानी,

भजन बिना कैसे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।