राजाओ के राजा महाकाल है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

राजाओ के राजा महाकाल है,

राजाओ के राजा महाकाल है,

महाकाल है,

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है,

राजाओ के राजा महाकाल है,

राजाओ के राजा महाकाल है,

महाकाल है,

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है.....

हरि से हर का जब हो गया मिलन,

जब हो गया मिलन,

हरि हर बने मेरे महाकाल है,

राजाओ के राजा महाकाल है,

राजाओ के राजा महाकाल है,

महाकाल है,

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है,

रखे सबकी लाज मेरे महाकाल है.....

मुझे हर जनम उज्जैन में मिले,

न मैं प्यारी प्यारी सूरत चाहता हूँ,

न मैं कोई मूरत कहता हूँ,

न में अलिशान-ए- भवन चाहता हूँ,

न में पैसा कोड़ी धन चाहता हूँ,

न में ढेर सारी दौलत चाहता हूँ,

न में बलवानों सा बल चाहत हूँ,

न में रोशनी की किरण चाहता हूँ,

न में चांद जैसा ललन चाहता हूँ,

महाँकाल तेरे चरण चाहता हूँ,

महाँकाल तेरे चरण चाहता हूँ,

बाबा में तो तेरा संग चाहता हूँ,

बाबा में तो तेरा संग चाहता हूँ,

मरु तो में शिप्रा का तट चाहता हूँ

उज्जैन का मैं भोले मरघट चाहता हूँ,

मुझे हर जनम उज्जैन में मिले,

उज्जैन में मिले,

हर साँस में बसे महाकाल है,

हर साँस में बसे महाकाल है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।