उमर सारी बीत गई माला ना फेरी

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॥ पावन पाठ ॥

उमर सारी बीत गई माला ना फेरी…..

भोर भऐ चिड़िया चहकाई,

मैं सबसे पहले जाग गई माला ना फेरी…….

नहाय धोय पूजा पर बैठी,

यह निदिया बैरन आ गई माला ना फेरी…….

पूजा करके मैने रसोई बनाई,

मैं सबसे पहले खा आई माला ना फेरी…….

भरी दुपहरी में घुमन को निकली,

मैं तेरी मेरी कलाई मौला ना फेरी….

सांझ भई मैंने खटिया बिछाई,

मैं सबसे पहले सो गई माला न फेरी..

यम के दूत जब लेने को आए,

मैं आगे आगे चल दी माला ना फेरी…..

एक बारी मौका देना हरि जी,

मैं माला तेरी फेर आई तेरे दर गई,

मै दान पुन्य कर आई तेरे दर आई……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।