साईं का रोजा सुहाना लगदा है

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॥ पावन पाठ ॥

साईं का रोजा सुहाना लगदा है ,

दुखियो का तो तुही ठिकाना लगता है,

एक पल नजरे जो देखे साईं को,

उसका शिर्डी आना जाना लगता है,

साईं का रोजा सुहाना लगदा है....

छोड़ के बंधन मैं तेरे दर पे आई हु,

दिल की जो हालत है साईं तुमको भुलाई हु,

तूने मुझको प्यार का वो धाम बक्शा है,

नाम कही पे बोला कही मेहमान बक्शा है,

सबका दिल तेरा नजरना लगता है,

दुखियो का तो तुही ठिकाना लगता है,

साईं का रोजा सुहाना लगदा है,

पांच घरो में भीख मांगी कुछ ना बोला है,

और हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई का राज खोला है,

साईं जी रहमत का खजाना लगता है,

दुखियो का तो तुही ठिकाना लगता है,

शिर्डी जाने का यही आसन रास्ता है,

दिल है शिर्डी साईं धरकन का एक हिसा है,

मेरा साईं इसा बहाना लगता है,

दुखियो का तो तुही ठिकाना लगता है,

ये जो हमसर है बन के सूफी आया है,

तुमने ये गाने का मुजको करम दिलाया है,

आप ही के नाम का हम सरे गाते है,

तेरी दया से साईं महातम हम करवाते है,

तेरे ही नाम का हम सब खाते है,

तेरे दया से साईं महातम हम करवाते है,

सबके लव पे येही तराना लगता है,

दुखियो का तो तुही ठिकाना लगता है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।