ध्यानपुर विच रहन वालेया

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॥ पावन पाठ ॥

कदे चलके तू मेरे वल आ ध्यानपुर विच रहन वालेया,

नही आऊंणा ते मैनू लै बुला ध्यानपुर विच रहन वालेया,

कदे चलके तू मेरे वल आ ध्यानपुर विच रहन वालेया...

मिलने दी आस मैनू हर वेले रहंदी ऐ,

शाम सवेरे बावा लाल उडीक तेरी रहंदी ऐ,

आके बच्चेयां नू दर्श दिखा ध्यानपुर विच रहन वालेया,

कदे चलके तू मेरे वल आ ध्यानपुर विच रहन वालेया...

श्रदा दे नाल तेरी ज्योत जगांवा मैं,

फूला नाल तेरा मै आसन सजावा मैं,

आके बच्चेयां ते मेहरा बरसा ध्यानपुर विच रहन वालेया,

कदे चलके तू मेरे वल आ ध्यानपुर विच रहन वालेया...

आवेंगा जे बावा लाल मेरा मन खिल जाएगा,

मैनू मेरे सतगुरु दा प्यार मिल जाएगा,

मैनू गोदी विच आके सुला ध्यानपुर विच रहन वालेया,

कदे चलके तू मेरे वल आ ध्यानपुर विच रहन वालेया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।