सोणें फुल वे गुलाब देया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सोणें फुल वे गुलाब देया

हो सांब सांब रखदी फिरां

मेरे गुरा जी दे बाग देया,

हो सोणें फुल.....

कोठे ते कां बोले,

हो चिट्ठी मेरे गुरा दी आई,

विच मेरा भी नाम होवे,

हो सोणें फुल.....

हो दो पतर अनारां दे,

गुरा जी दा दर्शन करके,

दुख मिटन बीमारां दे,

हो सोणें फुल.....

हो मैं तां आटा छाणदियां,

हो गड्डी मेरे गुरा दी आई,

मैं तां नंबर पछाणंदियां,

हो सोणें फुल.....

हो छपड़ी विच अंब तरेया,

हो गुरा जी दा दर्शन करके,

मेरा भी मन भरेया,

हो सोणें फुल.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।