मेरे सुख में मेरे दुख में

पारंपरिक
हनुमान जी भजन गुरुदेव भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सुख में मेरे दुख में, हरदम अंग संग है मेरे,

बाबा नीम करौली वाले करते पल में दूर अंधेरे....

हृदय में राम नाम जिसके बसा है,

हनुमत का रूप अंग अंग में रचा है,

जिस भूमि पर पांव धरा है, देखो स्वर्ग वहीं बना है,

वो तो पवन पुत्र हनुमाना ,काटे जन्म जन्म के फेरे.....

बाबा की नजरे जब से पड़ी हैं,

जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ बढ़ी हैं,

तन पे इक कंबल को डाल, वो तो सबकी करें सम्भाल,

सूरज भी जहां ला ना पाए, बाबा लाते वहां सवेरे......

खाली ना जाए कोई ऐसा ये दर है,

बाबा दिखाते सबको सच्ची डगर है,

वो भूले को राह दिखाते, पग पग रक्षा करते जाते,

जो भी शरण में आए उसको लूट ना पाए कभी पांच लुटेरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।