प्रभु के सामने सर को झुकाओ काफी है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु के सामने सर को झुकाओ काफी है,

धूप चंदन न सही मन में भाव काफी है....

नाना व्यंजन से नही रीझते हैं गिरधारी,

उन्हें तो प्रेम का चावल ही आधा काफी है.....

भाव के भूखे हैं और कोई उन्हें क्या देगा,

मन मेँ हो प्रेम तो छिलको का भोग काफी है....

लाख उनको बुलाओ वो कभी न आएंगे,

पूर्ण श्रद्धा से सिर्फ आधा नाम काफी है......

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।