ये नज़र महाकाल की

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तारने वाले हो कयामत की नजर रखते हो,

उज्जैन में बैठ कर जमाने की खबर रखते हो......

मुझको उठा के राह से दर पर बुला लिया,

पत्थर था मैं तो राह का हीरा बना दिया,

जिस दिन से मिला है मुझे इस दर का उतारा,

पहुँचा बुलंदियों पे था तकदीर का मारा,

ये नजर महाँकाल की......

थामा है महाँकाल के दामन को उम्र भर,

रखते है महाँकाल दीवानों की सब खबर,

वो भक्त जिंदगी में कभी हारते नही,

जिन भक्त पर पड़ी है महाँकाल की नजर,

ये नजर महाँकाल की......

मुश्किल का वक्त एक इशारे में टल गया,

जब नाम महाँकाल जुबाँ से निकल गया,

जादुई है बड़ी ये नजर महाँकाल की,

कृपा हुई नजर की जमाना बदल गया,

ये नजर महाँकाल की.......

तूफान की लहरों को किनारा बना दिया,

तिनके को डूबते का सहारा बना दिया,

क्या काम कर गई ये महाँकाल की नजरें,

पत्थर को चमकता हुआ सितारा बना दिया.....

उज्जैन के महाँकाल की होती है जब नजर,

बाबा के दर को छोड़के जाऊंगा मै किधर,

मैंने हजारो देवो की नजरों को देखा है,

सबसे अलग नजर है महाँकाल की नजर,

ये नजर महाँकाल की......

सारे जमाने वालो ने ठुकरा दिया मुझे,

एहसान महाँकाल का क्या क्या दिया मुझे,

चौखट है निराली बड़ी उज्जैन धाम है,

संसार के है राजा महाँकाल नाम है,

ये नजर महाँकाल की ये नजर महाँकाल की....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।