शिर्डी वाले साईं बाबा आया है तेरे दर पे सवाली

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॥ पावन पाठ ॥

ज़माने में कहाँ टूटी हुई तस्वीर बनती है ।

तेरे दरबार में बिगड़ी हुई तकदीर बनती है ॥

तारीफ़ तेरी निकली है दिल से आई है लब पे बन के कवाली,

शिर्डी वाले साईं बाबा आया है तेरे दर पे सवाली ।

लब पे दुआए, आँखों में आंसू, दिल में उमीदें, पर झोली खाली ॥

ओ मेरे साईं देवा, तेरे सब नाम लेवा ।

जुदा इंसान सारे, सभी तुझ को प्यारे ।

सुने फ़रिआद सब की, तुझे है याद सब की ।

बड़ा है कोई छोटा, नहीं मायूस लौटा ।

अमीरों का सहारा, गरीबो का गुजारा ।

तेरी रहमत का किस्सा बयान बावरा करे क्या ।

दो दिन की दुनिया, दुनिया है गुलशन, सब फूल कांटे, तू सब का माली ॥

खुदा की शान तुझ में, दिखे भगवान् तुझ में ।

तुझे सब मानते हैं, तेरा घर जानते हैं ।

चले आते हैं दौड़े, जो खुशकिस्मत हैं थोड़े ।

यह हर राही की मंजिल, यह हर कश्ती का साहिल ।

जिसे सब ने निकाला, उसे तुने संभाला ।

तू बिछड़ो को मिलाये, बुझे दीपक जलाए ।

यह गम की राते, राते यह काली, इनको बनादे बाबा ईद और दीवाली ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।