ग्यारस का भोग

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आई आई रे ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ.....

बींदणी रे जागे म्हारी,

टाबरिया सब सोवै छै,

फिर जावेंगे,

फिर जावेंगे, टाबर जाग,

के भोग लगा जाओ,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा.....

ताजा पाणी लेके,

थारो खींचड़ो बणायो छै,

जिसमे लगवाई रे,

घी की धार,

के भोग लगा जाओ,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा.....

बींदणी रे बरती म्हारी,

टाबरिया सब जिद्दी छै,

कदे करदे ना झूठ मिठास,

के भोग लगा जाओ,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा…..

चूरमो बणायो श्याम,

भोग थे लगाओ जी,

थारी देखे रे भगत यूँ बाट,

के भोग लगा जाओ,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा….

कौशिक और भगवान् दास,

अर्जी यो लगावे जी,

म्हारी रख ले, रे बाबा लाज,

के भोग लगा जाओ,

आई आई रे, ग्यारस की रात,

के भोग लगा जाओ,

एक बार आओ जी,

श्याम म्हारे आंगणा…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।