लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी

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॥ पावन पाठ ॥

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

लांगुर तेरे कारण गेंद बन जाऊंगी,

गेंद बन जाऊंगी मैं बल्ला बन जाऊंगी,

लांगुर तेरे कारण गेंद बन जाऊंगी.....

जो लांगुर तोहै भूख लगेगी,

पूरी ऊपर पूड़ी कचौड़ी बन जाऊंगी,

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

जो लांगुर तोहै प्यास लगेगी,

कैंपर में पेप्सी बन जाऊंगी,

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

जो लांगुर तोहै गर्मी लगेगी,

पंखा में ऐसी बन जाऊंगी,

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

जो लांगुर तोहै सर्दी लगेगी,

कंबल ऊपर कंबल रजईया बन जाऊंगी,

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

जो लांगुर तोहै नींद लगेगी,

गद्दा ऊपर गद्दा में बेड बन जाऊंगी,

लांगुरिया तेरे खातिर जोगन बन जाउंगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।