छम छम बाजे मैया के पायलिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चांदी के पायलिया तोहरी सोने के कंगनवां मैया छम छम बाजे ना

चम चम चमकत बा लीलरवा मैया छम छम बाजे ना ॥

लाली लाली अंखिया बा लाली रंग चुनरिया,

लालई रंग पताका फहराई तोहरी दुअरिया ॥

गर में बा मोतियन के हरवा मैया छम छम बाजे न ॥

आदिशक्ति मैया तोहके जाने जग जहानवा,

शुम्भ अउ निशुम्भ क तू कै दिहलू बधनवा

काटिऊ महिषासुर के गरवा मैया छम छम बाजे ना॥

बड़ा सुख शांति मिले तोहरे शरण में,

राधेश्याम कंठी पूजै निर्मोही चरण मे,

देद दिनेशऊ के सहरवा मैया छम छम बाजे ना॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।