मेरा भोला बड़ा अलबेला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा भोला बड़ा अलबेला,

वो तो डमरू बजाए अकेला....

कभी चंदा के संग कभी गंगा के संग,

कभी गौरा के संग में अकेला वो तो डमरू बजाए अकेला,

मेरा भोला बड़ा अलबेला वो तो डमरू बजाए अकेला......

कभी बिच्छू के संग कभी सर्पों के संग,

कभी भूतों के संग में अकेला वो तो डमरू बजाए अकेला,

मेरा भोला बड़ा अलबेला वो तो डमरू बजाए अकेला......

कभी गाजा पिए कभी भंगिया पिए,

कभी खाए धतूरा अकेला वो तो डमरू बजाए अकेला,

मेरा भोला बड़ा अलबेला वो तो डमरू बजाए अकेला......

करें दुष्टों का नाश रहे भक्तों के साथ,

सब जीवों का देव अकेला वो तो डमरू बजाए अकेला,

मेरा भोला बड़ा अलबेला वो तो डमरू बजाए अकेला......

Shweta Pandey (Varanasi)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।