मेरे नैना विच्च रसिया आन वसेया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे नैना विच्च रसिया आन वसेया, नैन खोला किवें,

नैन खोला किवें, खोला किवें, खोला किवें, नैन खोला किवें.....

नैन खोलदे ते लोकी मेनू पुछदे, हां पुछदे,

कित्थे रखेया इ लाल नु लको के, हां लको के,

एह सुन के मैं नैना नु होर कसिया, नैन खोला किवें.....

राती सुपने दे विच रसिया आ गए, हां आ गए,

मेरी मांग विच्च सुहा रंग पा गए, हां पा गए,

मैं ता हो गयी सुहागन अंग अंग रंगेया, नैन खोला किवें.....

रब बनके ते जग विच आ गया, हा आ गया,

तीना लोका विच धुमा पा गया, हा पा गया,

कोने कोने दे विच प्रकाश हो गया, नैन खोला किवें.....

हारा वाले ने साडी दिति ज्ञान दी, हा ज्ञान दी,

मैं ता ला लई किनारी ओहदे नाम दी, हा नाम दी,

साडी पाके कलेजा मेरा रजिया, नैन खोला किवें.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।