रँगीलो जोगी आयो परणबा ने

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गोरा थारी जाँन तो चडीँ काँकड मे,

रँगीलो जोगी आयो परणबा ने.....

ना कोई हाथी ना कोई गुडँला सँग मे,

लायो भुताँ ने बराती हीमाचल की सान गमाई,

आयो परणबाने गोरा थारी जान तो चडी काँकड मे.....

बूढो बीँद लटकती डाडी, परणे बीस बरस की लाडी,

नाँदया पे हो असवार रँगीलो जोगी,

आयो परणबाने गोरा थारी जान तो चडी काँकड मे.....

माया माहादेव न्यारी, परणे हीमाचल की प्यारी,

भगवान साय पर कृपा करदो मीलादे सुँदर नारी,

गोरा थारी जाँन तो चडीँ काँकड मे,

रँगीलो जोगी आयो परणबा ने.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।