महाकाल अपने दर पे बुलाले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महाकाल बाबा उज्जैन वाले,

जीवन मेरा तेरे हवाले,

दर दर भटका पड़ गए छाले,

मुझको तू उज्जैन बुलाले,

मैं तो न जाऊ किसी दर पे,

तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले अपने दरबार मे तू बुलाले.....

साँचा दरबार है करलो दीदार है,

बेल पत्री तू आके चढ़ा दे,

तेरी झोली भरे हाँथ सर पर धरे,

बात दिल की तू इनको सुना दे,

सब भक्तो का काम किया है,

किस्मत से भी ज्यादा दिया है,

मैं तो न जाऊ किसी दर पे,

तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले अपने दरबार मे तू बुलाले.....

ये दयावान है ऐसे भगवान है,

तीनो लोको में इन सा ना दानी,

देव के देव है ये महादेव है,

इनकी ताकत को सबने है मानी,

इनके चरण का हो जा दीवाना,

मिल जाएगा तुझको ठिकाना,

मैं तो न जाऊ किसी दर पे,

तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले अपने दरबार मे तू बुलाले.....

सुनो उज्जैन के वासी काट दो यम की अब फांसी,

तुम्हारा नाम गाता हु तुम्हे हर पल मनाता हूं,

बैठ नंदी पर अब आओ सांथ में गोरा को लाओ,

"प्रेमी" की झोलिया भरना आज देरी नही करना,

मैं तो न जाऊ किसी दर पे,

तू बुलाले बुलाले बुलाले तू बुलाले अपने दरबार मे तू बुलाले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।