मेरे महाकाल का दर है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लेते ही नाम भोले का तूफान हट गया,

कश्ती पर मेरी आके समंदर सिमट गया,

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है...

महाकाल की कृपा से बतलाऊं क्या मिला,

मुझे बतलाऊं क्या मिला,

इज्जत मिली शोहरत मिली तेरा पता मिला,

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है.....

जिस वक्त मैंने दोस्तों भोले को पुकारा,

फौरन हीं मिल गया मुझे मुश्किल में सहारा,

जब से मैंने महाकाल तेरा रूप निहारा,

कस्ती को मेरी तुमने प्रभु पार उतारा,

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है.....

मुझ जैसे को भी आपने दर पर बुला लिया,

दामन में महाकाल ने मुझको छुपा लिया,

मेरे प्रभु का मुझपे ये एहसान देखिए,

हाँ जी एहसान देखिए,

मेरे प्रभु का मुझपे ये एहसान देखिये,

मुझ जैसे को भी आपने अपना बना लिया,

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है.....

और बाबा महाकाल के दरबार में दीवाना बाबा से कहता है क्या......

आपसे आपकी चौखट का सहारा लेकर,

क्या से क्या हो गया मैं नाम तुम्हारा लेकर,

लाज रख लो मेरी मैं आपका कहलाता हूं,

आपके दीवानों में बाबा गिना जाता हूं,

कोई भी दर नहीं संसार में इस दर जैसा,

मिल गया मुझको नसीबों से तेरा दर ऐसा,

चौखट मिली है जबसे मुझे तेरे नाम की,

इज्जत जहां में होने लगी इस गुलाम की...

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है,

ये तो महाकाल का दर है,

मेरे महाकाल का दर है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।