जय श्री महाकाल शम्भो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( अरे हम महाकाल कालो के काल के भक्त है साहब,

हमें मौत का खोफ मत दिखाना। )

जय श्री महाकाल शम्भो कालो के काल शम्भू हैं ये त्रिकाल भोले शम्भो,

राजा हैं राजा हैं तिनों लोक के महाराजा हैं....

9पीये हलाहल सर्पो की माला चन्दा सजे है मस्तक विशाला,

राजा हैं राजा हैं तिनों लोक के महाराजा हैं,

जय श्री महाकाल शम्भो कालो के काल शम्भू हैं ये त्रिकाल भोले शम्भू....

( अरे हम महादेव के भक्त है साहब किसी के गुलाम नहीं,

और हर किसी के समझ में आ जाऐ इतने भी आम नही। )

मस्ती में झुमे दुनिया में घुमे,

भोले के भक्त सारे आसमान चुमे,

राजा हैं राजा हैं तिनों लोक के महाराजा हैं,

जय श्री महाकाल शम्भो कालो के काल शम्भू हैं ये त्रिकाल भोले शम्भू....

( शमशान की भस्म तन पे रमाऊ तुम जाओ चारो धाम में तो बस उज्जैन जाऊ । )

कृपा जयेश पे करो त्रिपुरारी,

चेतन हो शर्मा जो कृपा तुम्हारी,

राजा हैं राजा हैं तिनों लोक के महाराजा हैं,

जय श्री महाकाल शम्भो कालो के काल शम्भू हैं ये त्रिकाल भोले शम्भो राजा हैं,

राजा हैं तिनों लोक के महाराजा हैं,

अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चान्डाल का,

काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।