आ जाओ न बाईसा मेरे मकान में

पारंपरिक
श्री गणेश भजन विविध भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - अफसाना लिख रही हूँ

आ जाओ न बाईसा, मेरे मकान में,

थारी छम छम पायल बाजे, सारे जहान में,

आ जाओ न बाईसा....

थारी पायल की छम छम से, गणनायक आ गये,

गणेश जी आ गये,

रिद्धि सिद्धि संग लेके, मेरे मकान में,

थारी छम छम पायल बाजे, सारे जहान में,

आ जाओ न बाईसा....

थारी पायल की छम छम से, भोले जी आ गये,

शंकर जी आ गये

माँ पार्वती को लेके, मेरे मकान में,

थारी छम छम पायल बाजे, सारे जहान में,

आ जाओ न बाईसा....

थारी पायल की छम छम से, कान्हा जी आ गये,

कृष्ना जी आ गये,

राधा रुक्मण संग लेके, मेरे मकान में,

थारी छम छम पायल बाजे, सारे जहान में,

आ जाओ न बाईसा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।