हरि की माया न्यारी है

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हरि की माया न्यारी,

माया न्यारी है, लीया शरण तुम्हारी है,

यही अरदास हमारी है....

कैसी माया है देखो या हर की,

किसी के घर ना किसी के सरकी,

ऐश कोई कोठी में करता,किसी का पेट नहीं भरता,

कोई जोड़ जोड़ धरता कोई बन्या भिखारी है,

हरि की माया न्यारी है....

कोई धरमी है कोई रे कसाई,

कोई पंच बन्या अन्यायी,

भवादे बोदे के भंगा,

कोई बिन कपड़े नंगा किसी के बणी अटारी है,

हरि की माया न्यारी है....

कोई पंछी ने चुगा चुगाता,

कोई मार मार के खाता,

कोई करता सट्टा बाजी,

कोई है झगड़े में राजी,

दुनिया डोल रही बाजी माल का सब व्योपारी है,

हरि की माया न्यारी है....

भगवान भरोसा है तेरा,

करदे दिल का तु दूर अंधेरा,

टेरिया अमरसिंह पक्का,

मातिया जाने ना खाका,

लगादे घिसा के धक्का गुरु मेरा बनवारी है,

हरि की माया न्यारी है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।