श्री जी का अभिषेक पाठ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

श्री जी का अभिषेक करे हम नेक,

शुद्ध जल द्वारा धूल जाए पाप हमारा ॥ टेक ॥

श्री जी अनंत गुण वाले है, परम शुद्ध तन वाले है,

इनके चरणों में वंदन कर शत् वारा,

फिर करें शुद्ध जल धारा ॥ श्री जी का… ॥

सुर इन्द्रलोक भी स्वर्गो में, अभिषेक करे नित भवनों में,

है पूज्य अकृत्रिम बिम्ब सकल सुर द्वारा,

स्वर्गो में भी सुखकारा ॥ श्री जी का… ॥

त्रय अष्टाह्निक के पर्वो में, श्री नंदीश्वर के भवनों में,

सुरपति भी जाते लेकर सब परिवारा,

अभिषेक करे हरबारा ॥ श्री जी का… ॥

श्री जी पर जल जो ढारत है, वह गंधोदक सुख कारक है,

मैना सुन्दरी ने गंधोदक के द्वारा,

किया क्षण में कोढ़ निवारा ॥ श्री जी का… ॥

गंगा की धारा पर्वत से, गिरती है श्री जी के शिर पे,

इसी लिए तो जग में जन-जन द्वारा,

पूजित है गंगा धारा ॥ श्री जी का… ॥

सुर गणधर जिन्हें न छू पाये, हम आज इन्हें है छू पाते,

यह धन्य घडी मिल जाये बारंबार,

यह भाव भाव कर धारा ॥ श्री जी का… ॥

सुख शान्ति अगर तुम चाहो तो झट धोती पहन कर आओ तो,

कर एक बार तो प्रभु की शान्ति धारा,

बने जीवन उत्तम सारा ॥ श्री जी का… ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।