अमलीड़ो बाबो अम्लिडो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अमलीड़ो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो

बाबो अम्लिडो बाबो अमलीड़ो,

भक्ता ने लागे बालो,

भक्ता ने लागे प्यारो,

म्हारो राम रुणिचे वालो,

बाबो भोलो अमलीड़ो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो,

भोलो अम्लिडो भोलो अम्लिडो

गांजा की चिलमा पीवे,

और नाग गले लिपटावे,

म्हारो बाबो भोलो अम्लिडो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो,

भोलो अम्लिडो भोलो अम्लिडो

मावा मिठाई खावे,

नारेल्या रा भोग लगावे,

म्हारो बाबो भोलो अम्लिडो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो,

भोलो अम्लिडो भोलो अम्लिडो

हाथा में भालो सोवे,

घुड़ले पे दौडयो आवे,

म्हारो बाबो भोलो अम्लिडो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो,

भोलो अम्लिडो भोलो अम्लिडो

भक्ता रा कष्ट मिटावे

रानी बाबा ने गावे,

‘तेज़ी’ और ‘भाटी’ अम्लिडो,

म्हारो बाबो भोलो अम्लिडो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो अम्लिडो

बाबो अम्लिडो बाबो अम्लिडो,

भक्ता ने लागे बालो,

भक्ता ने लागे प्यारो,

म्हारो राम रुणिचे वालो,

बाबो भोलो अम्लिडो,

अम्लिडो अम्लिडो।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।