माँ छगनी के दुलारे पधारो घर पे हमारे

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - पधारो गाँव हमारे गुरुवर

झूमे धरती अम्बर कहती है ये पवन,

आज घर आयेंगे बाबोसा भगवन,

आओ मिलके सजाये घर आँगन,

शुभ दिन आया है बड़ा मन भावन,

राहों में हम पलके बिछाकर बाट निहारे,

पधारो माँ छगनी के दुलारे,

बाबोसा घर पे हमारे.....

जय जय श्री बाबोसा, जय जय श्री बाबोसा,

डगर डगर ये सारा नगर देखो दुल्हन सा है सजाया,

रंगोली से चोक सजाकर, कुमकुम कलश भराया,

पग पग दीपक प्रगटाये, ज्यु अम्बर में चमके तारे,

पधारो माँ छगनी के दुलारे,

बाबोसा घर पे हमारे.....

आपके श्री चरणों पड़े तो, ये धरती पावन हो जाये,

भक्तो की अर्जी सुनकर के, शुभागमन हो जाये,

चुरू के राजा कब होंगे, दर्श तुम्हारे,

पधारो माँ छगनी के दुलारे,

बाबोसा घर पे हमारे.....

एक यही अभिलाषा मेरी, पाँउ में दर्शन तुम्हारे,

दिलबर तेरी शरण मे आकर, तुझपे जीवन वारे,

अब न तड़फ़ाओ, जल्दी आओ, द्वार हमारे,

पधारो माँ छगनी के दुलारे,

बाबोसा घर पे हमारे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।