तेरी सदा ही जय होवे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय होवे, जय होवे,

जय होवे तेरी जय होवे,

( सच्चियाँ ज्योता वाली माँ

तेरी सदा ही जय होवे... )

सोणा दर तेरा विच पहाड़ी,

अर्शों फुल पये वरदे ने,

ब्रह्मा विष्णु शिव शंकर वी,

तेरी हाज़री भरदे ने,

गंगा चरणा च बह होवे,

जय होवे तेरी जय होवे.....

पानी उत्ते जग उपजाया,

तू ही शेरांवाली माँ,

किसदी झोली कद भरनी और,

कद तक रखनी खाली माँ,

सब तेरे दर तय होवे,

जय होवे तेरी जय होवे.....

मैं की सूरज चन्न सितारे,

सब तेरे करज़ाई माँ,

किन्नी वी तेरी महिमा गांवां,

नइं चुकनी इक पायी माँ,

फिर क्यों मेरे विच मैं होवे,

जय होवे तेरी जय होवे.....

गीत: श्यामसाजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।