अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अम्बाजी

हे अंबे

अम्बाजी अम्बाजी,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी,

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी,

नवरात्रि रातो में रूप नौ ध्याये,

अलग अलग रूप धर मात मेरी आये....

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी

पहली माँ शैलपुत्री पार्वती माता,

शंकर अर्धांगिनी शेरोंवाली माता,

दुजी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म स्वरूप ध्याये,

जो भी रूप धरे मैया हमको बहुत भाये,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी....

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी

जय जय जय माँ

घंटास्त चंद्रमा चंद्र घंटा तेरे,

परमानंद देती मैया पाप कटे मेरे,

उदर में संसार धरे कूष्माण्डा माता,

पाप ताप हरे तीन लोको की ज्ञाता,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी....

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी

स्कंद देव की जननी देवी स्कंद माता,

कितने पुण्य कितने तप पायी ऐसी माता,

ऋषियों की रक्षा करने प्रगट भयी कात्यायनी,

तू ही माँ चामुंडा तू ही माँ जगत जननी,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी....

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी

जय जय जय जय माँ

काल की विकाल भयी देवी काल रात्रि,

रक्षा करने सक्षम माँ इसकी हमको खात्री,

आठवीं माँ गौरी है रूप गौर गौर है,

चारो और तेरे नाम का ही मचा शोर है,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी.....

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी

सर्व सिद्धि देने वाली नवमी सीधी दात्री,

अष्टभुजा नवदुर्गा रूप से नवरात्रि,

नाम लिये नाच नाच तेरे गुण गायेंगे,

छोटे से जीवन में पुण्य कुछ पायेंगे,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी,

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी....

नवरात्रि रातो में रूप नौ ध्याये,

अलग अलग रूप में धर मात मेरी आये,

अम्बाजी हो मेरी अम्बाजी,

अम्बाजी ओ मेरी अम्बाजी....

हे अंबे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।