बच्चों से कभी मैया यूँ रहती दूर नहीं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बच्चों से कभी मैया,

यूँ रहती दूर नहीं,

हम तो मजबूर हैं माँ,

तुम तो मजबूर नहीं,

बच्चों से कभी मैया......

तेरे दरस को मेरी माँ,

मेरे नैन तरसते हैं,

रुकते नहीं पल भर भी,

दिन रात बरसते हैं,

तुमसे हम दूर रहे,

दिल को मंजूर नहीं,

हम तो मजबूर हैं माँ,

तुम तो मजबूर नहीं,

बच्चों से कभी मैया.....

लेनी है परीक्षा तो,

माँ और कोई ले ले,

गम तेरी जुदाई का,

हम कैसे बता झेले,

बच्चों को तड़पाना,

तेरा दस्तूर नहीं,

हम तो मजबूर हैं माँ,

तुम तो मजबूर नहीं,

बच्चों से कभी मैया…...

आजा मेरी मैया,

नहीं और सहा जाये,

जीवन का भरोसा क्या,

कहीं देर ना हो जाए,

दिल टूट के सोनू का,

हो जाए चूर नहीं,

हम तो मजबूर है माँ,

तुम तो मजबूर नहीं,

बच्चों से कभी मैया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।