झूला पीपल पे डलवा दूंगी मेरी शेरोवाली मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूला झूले, झूला झूले,

मैया मेरी झूला झूले,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

मेरी शेरोवाली मैया,

मेरी मेहरोंवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया……

इस झूले पे ब्रह्मा जी झूले,

ब्रह्मा संग ब्रह्मानी झूले,

झोटा नारद से दिलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया…..

इस झूले में विष्णु जी झूलें,

इस झूले में विष्णु जी झूलें,

विष्णु के संग में लक्ष्मी झूले,

झौटा शेषनाग से दिलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया…….

इस झूले में राम जी झूलें,

राम के संग में सीता झूलें,

झौटा हनुमंत से दिलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया....

इस झूलें में कृष्ण जी झूलें,

कृष्ण के संग में राधा झूले,

झौटा उद्धव से दिलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया.....

इस झूले में दुर्गे झुले,

दुर्गे के संग में जोगिनी झूले,

झौटा लांगुर से दिलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया,

झूला पीपल पे डलवा दूंगी,

मेरी शेरोवाली मैया…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।