माँ दो फूल खिलादो जीवन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जयकारा, शेरावाली का,

बोलिये सांचे दरबार की जय,

मेरा मन नहीं लगता, ओ मैया,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे.....

माना तेरी सेवा मुश्किल है,

माना तेरी सेवा मुश्किल है,

चौखट पे गुज़ारा कर लेंगे,

मंदिर में गुजारा कर लेंगे…….

दो फूल खिला दो जीवन में,

दो फूल खिला दो जीवन में,

खुशबु से गुजारा कर लेंगे,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे……

माना तेरा लहंगा लाखों का,

माना तेरा लहंगा लाखों का,

चुनरी से गुजारा कर लेंगे,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे……

माना तेरा जागरण लाखों का,

माना तेरा जागरण लाखों का,

कीर्तन में गुजारा कर लेंगे,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे……

माना तेरा भंडारा लाखों का,

माना तेरा भंडारा लाखों का,

हलवे में गुजारा कर लेंगे,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे……..

मेरा मन नहीं लगता, ओ मैया,

माँ, मंदिर में गुजारा कर लेंगे…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।