एक दो तीन चार माता जी की जय जयकार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सच्चे मन से माँगे जो भी,

देती छप्पर फाड़,

सच्चे मन से माँगे जो भी,

देती छप्पर फाड़,

माँ झूठी है ये दुनियां दारी,

सच्चा तेरा द्वार,

बोलो एक दो तीन चार,

माता जी की जय जयकार,

ढोल वाले भैया,

जय मैया जय मैया,

ना चाहे कोई धन दौलत,

और नाहीं कोई रुपया,

ढोल वाले भैया,

जय मैया जय मैया......

छेड़ा तूने नारी को,

अब किस्मत तेरी माड़ी है,

आजकल के पापियों सुन लो,

नारी सब पर भारी है,

नारी सब पर भारी है,

झांसी वाली रानी की तूने,

देखी है तलवार,

निकल ले भैया पतली गली से,

मत कर कोई विचार,

बोलो एक दो तीन चार,

माता जी की जय जयकार.....

झूठी है सब मोह माया,

बीस सच्चा माँ का प्यार,

नाही कोई धोखा है इसमें,

नाहीं झूठा प्यार,

इक बार नहीं सो बार नहीं,

तुम मांगो बार बार,

दे देगी पलभर में,

खुशियों का समाचार,

बोलो एक दो तीन चार,

माता जी की जय जयकार…...

नादान हैं हम बालक तेरे,

हमको कुछ नहीं आता,

दे दो ज्ञान हमको शेरोवाली माता,

मतलब की ये रिश्तेदारी,

मतलब का संसार,

मिला नहीं मुझे कोई सहारा,

मिला है माँ का प्यार,

बोलो एक दो तीन चार,

माता जी की जय जयकार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।