माँ तेरी पूजा करूँ दिन रात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माँ ....जय जय माँ तेरी जय जय माँ....

फूल चढ़ाऊँ चुनरी उढ़ाऊँ करूँ तेरा श्रृंगार माँ मैं,

अब आई है नवरात माँ तेरी पूजा करूँ दिन रात,

जय जय माँ ....जय जय माँ तेरी जय जय माँ....

धन्य हुआ है उसका जीवन तेरी शरण में आये जो,

मुंह माँगा फल मिल जाता है चरणों में शीश नवाये जो,

अबके बरस मिल जाए दरस तो बन जाए कुछ बात माँ,

अब आई है नवरात माँ तेरी पूजा करूँ दिन रात,

जय जय माँ ....जय जय माँ तेरी जय जय माँ....

अष्ट भुजा तेरा रूप सलोना महिमा अपरम्पार माँ,

ढोल नगाड़े संग करें हम तेरी जय जयकार माँ,

नौ दिन तेरे नौ रूपों में करे सबका उद्धार माँ,

अब आई है नवरात माँ तेरी पूजा करूँ दिन रात,

जय जय माँ ....जय जय माँ तेरी जय जय माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।