प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चाहे जितनी उम्र हमारी,

पर माँ के है बच्चे सारे,

आओ याद करे पहाड़ा वाली को,

गिन कर आज पहाड़े,

दो एकम दो दो दुनी चार,

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार,

दो एकम दो दो दूनी चार,

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार,

दो तिया छ दो चौके आठ,

देखो जी देखो जी,

मेरी मैया जी के ठाठ,

दो एकम दो दो दूनी चार,

हो मैया की महिमा है बड़ी महान,

जयकारे से गूंजता है सारा जहान,

जयकारे से गूंजता है सारा जहान,

शेरावाली मैया तेरी ऊँची है शान,

बच्चों को ममता को देती वरदान,

बच्चों को ममता को देती वरदान,

लाल है बिंदिया लाल है चुनरिया,

जय हो, चुनरिया, जय हो

लाल है बिंदिया लाल है चुनरिया

लाली करे कमाल

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

दो एकम दो दो दुनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

दो पन्जे दस दो छक्के बारह

भक्तो को मैया ने दिया सहारा

दो एकम दो दो दूनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की जय जयकार

शक्ति की ज्योति देवो ने लगाई,

शक्ति की शक्ति ने धूम मचाई,

शक्ति की शक्ति ने धूम मचाई,

भरते है पानी देवताओं के राजा,

राजा इंद्र ने बाल्टी मंगाई,

राजा इंद्र ने बाल्टी मंगाई,

भैरव करते है निगरानी,

जय हो, भैरव करते है निगरानी

लेकर हाथ में भाला लाल लाल

हो चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

हो चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

हो बोलो

दो एक्म दो दो दुनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

दो सत्ते चौदह दो अठे सोलह

मैया जी के भजनों मे तन मन डोला

दो एकम दो दो दुनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

पवन देव ने आके रसोई बनाई,

सूरज की किरणों ने अग्नि जलाई,

सूरज की किरणों ने अग्नि जलाई,

चंद्रमा की चांदनी ने किया है उजाला,

तारी सितारों ने थाली सजाई,

तारो सितारों ने थाली सजाई,

तारो सितारों ने थाली सजाई,

शेरावाली के भरे भंडारे,

जय हो,शेरावाली के भरे भंडारे

करती है मालामाल लाल लाल

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

चोला लाल मैया का चोला लाल लाल लाल

दो एक्म दो दो दनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

दो एक्म दो दो दुनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

दो नव्वे अठरह दो दहे बीस

शक्ति के चरणों मे झुक जाए शीश

दो एक्म दो दो दूनी चार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

प्रेम से बोलो मैया जी की है जय जयकार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।