सासु बूझे बहुड़ ते

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सासु बूझे बहुड़ ते,

तू के लायी सै पीहर से,

साँची साँच बता दूँ रे सासु,

के ल्याई हूँ पीहर ते,

मैं ऐसी ल्याई चूँदरी....

मेरी चुंदड़ी में पूजा हो रही,

गौरी नंद गणेश की,

मेरी चूँदरी में शेरवाली,

आठ पहर विश्राम करे,

मैं ऐसी ल्याई चूँदरी,

सासु बूझे बहुहड़ ते,

तू के लायी सै पीहर से.....

मेरी चूँदरी में ब्रह्मा विष्णु,

शंकरजी भी वास करे

मेरी चूँदरी में लक्ष्मी गायत्री,

पार्वती भी वास करे,

मैं ऐसी ल्याई चूँदरी,

सासु बूझे बहुहड़ ते,

तू के लायी सै पीहर से....

मेरी चूँदरी में राम और लक्ष्मण,

सीताजी भी वास करे

मेरी चूँदरी में हनुमानजी,

सारी दुनिया परणाम करे,

मैं ऐसी ल्याई चूँदरी,

सासु बूझे बहुहड़ ते,

तू के लायी सै पीहर से.....

मेरी चूँदरी में सत्संग होरया,

सतगुरूजी उपदेश करे

जब सतगुरु उपदेश करे,

ये सारी दुनिया ध्यान करे,

मैं ऐसी ल्याई चूँदरी,

सासु बूझे बहुड़ ते,

तू के लायी सै पीहर से....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।